प्राइवेट स्कूलों में फीस बढ़ाने का कोई भी फैसला उचित कारण और पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। कई बार स्कूल नई सुविधाएँ, जैसे स्मार्ट बोर्ड या नई तकनीक, लगाने के नाम पर फीस बढ़ा देते हैं। अगर वास्तव में छात्रों को उसका लाभ मिल रहा है, तो यह समझ में आता है, लेकिन बिना स्पष्ट कारण बार-बार फीस बढ़ाना सही नहीं है।
इसके अलावा, कई स्कूल फीस की रसीद में लाइब्रेरी, लैब, कंप्यूटर, खेल या अन्य सुविधाओं के नाम पर अलग-अलग शुल्क लेते हैं। लेकिन जब छात्र उन सुविधाओं को देखते हैं, तो कई बार वे मौजूद ही नहीं होतीं या उनका उपयोग करने लायक व्यवस्था नहीं होती। उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्र से लाइब्रेरी शुल्क लिया जा रहा है, तो स्कूल में एक अच्छी और कार्यरत लाइब्रेरी होना आवश्यक है। यदि सुविधा उपलब्ध ही नहीं है, तो उस मद में शुल्क लेना अनुचित है।
हर स्कूल को यह स्पष्ट बताना चाहिए कि फीस किस-किस चीज़ के लिए ली जा रही है और उस राशि का उपयोग कहाँ किया जा रहा है। छात्रों और अभिभावकों को वही शुल्क देना चाहिए जिसके बदले उन्हें वास्तविक और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएँ मिल रही हों।
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