17.07.2026 से शांतिपूर्ण जन-अनशन / संवैधानिक प्रतिरोध
पंचशील कौशल सेवा संस्थान, जब जनता सेवा के बदले शुल्क देती है; इसलिए पारदर्शी, जवाबदेह और न्यायपूर्ण सेवा उसका अधिकार है।
अभिलेखीय सत्य को दबाया नहीं जाना चाहिए।
न्याय और प्रशासनिक उत्तरदायित्व केवल कागज़ी शब्द न रहें, बल्कि व्यवहार में भी दिखाई दें।
इसी उद्देश्य से दिनांक 16.07.2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली में उपस्थित संवैधानिक सरोकार रखने वाले साथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं जन-आंदोलन से जुड़े व्यक्तियों से सौजन्य भेंट, विचार-विमर्श तथा मुख्य जनहित बिंदुओं जो वर्षों से न्याय, सेवा और जवाबदेही की प्रतीक्षा में खड़े हैं।
इसके उपरांत, दिनांक 17.07.2026, शुक्रवार से श्री नारायण प्रसाद केशरवानी स्वयं भी जंतर-मंतर, नई दिल्ली में प्रस्तावित शांतिपूर्ण अनशन/धरना/विरोध प्रदर्शन में सहभागी होंगे और संविधान-सुरक्षा, जन-अधिकार संरक्षण तथा दस्तावेज़-आधारित जन-प्रतिवेदन के पक्ष में अपना शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक योगदान देंगे। यह जनहितकारी संवैधानिक होगा।
अभिजीत दीपके जी, सोनम मंचुक जी तथा वे सभी साथी, जो विद्यार्थियों, नागरिक अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और जन-सरोकार के प्रश्नों के प्रति संवेदनशील हैं, उनसे सादर अनुरोध है कि इस विषय पर विचार कर आवश्यक सहयोग, मार्गदर्शन और सहभागिता प्रदान करें। शांतिपूर्ण विरोध का उद्देश्य व्यवस्था को तोड़ना नहीं, बल्कि उसे उसके ही संवैधानिक दायित्व की याद दिलाना है।
3. Protection और Protest का संबंध
Protection और Protest विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं।
जहाँ अधिकारों, गरिमा, सेवा-अधिकार, न्याय और अभिलेखीय सत्य की रक्षा की आवश्यकता हो, वहाँ Protection आवश्यक है; और जहाँ व्यवस्था सुनना बंद कर दे, कार्यवाही टाल दे, सेवा-अधिकार प्रभावित हों या न्याय अनिश्चित हो जाए, वहाँ Protest आवश्यक हो जाता है। अधिकारों की ढाल है; Protest अधिकारों के हनन के विरुद्ध लोकतांत्रिक पुकार है। दोनों का साझा उद्देश्य यही है कि संविधान से जनता को मिले अधिकार सुरक्षित रहें, शासन-तंत्र जवाबदेह बने, और नागरिक गरिमा को उपेक्षा, मौन या अन्याय के हवाले न किया जाए।
भूमिका / संविधान और नागरिक अधिकार
Protection और Protest : संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और शांतिपूर्ण जन-प्रतिरोध
Protection
Protest
अंतिम आह्वान / नारायण प्रसाद केशरवानी
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